पर्यावरण

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वैश्विक ऊष्मीकरण के इस युग में पर्यावरण का महत्व काफी बढ़ जाता है। प्रकृति को उसकी विरासत वापस करने के लिए सेल ने अपने सभी कारखानों और खानों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया है।

सेल की पूर्णपानी फ्लक्स खानों में वन लगाकर 200 एकड़ निम्न श्रेणी की भूमि को पुन: उपजाऊ बनाया गया है तथा इन स्थानों पर बागों, वनों में लगाए जाने वाले विभिन्न किस्म के पेड़-पौधे तथा घास लगाई गई है। पूर्णपानी की खाली की गई खदानों में मत्स्य पालन शुरू किया गया है तथा खदान के जमा पानी में 3 लाख मछलियों के अण्डे छोड़े गए हैं। इसके अतिरिक्त इस मौसम में 50 विभिन्न किस्मों के 30 हजार पेड़-पौधे भी लगाए गए हैं तथा खदानों के पानी में 5 लाख और अण्डे छोड़े गए हैं।

पर्यावरण 

निम्न श्रेणी की 10 एकड़ भूमि में 10,000 वृक्षारोपण किया गया हैं। इनमें से बरसुआ लौह अयस्क खानों में 4,000 पौधे लगाने का काम पूरा कर लिया गया है। हाल ही में छत्ताीसगढ़ क्षेत्र में चिकित्सा की दृष्टि से महत्वपूर्ण आंवले के पौधे लगाए गए हैं।

संवृध्दि विकास की दृष्टि से 21वीं शताब्दी के पर्यावरण कार्यों को देखते हुए सेल ने बायो-टेक्नोलॉजी, भारत सरकार तथा डी-ग्रेडेड इको प्रणाली पर्यावरण प्रबंधन केन्द्र, दिल्ली विश्वविद्यालय के साथ खाली की गई खानों की स्थिति पूर्ववत् बनाने और व्यर्थ जाने वाले ठोस तत्वों को एक स्थान पर जमा करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

सेल की इस्पात नगरियों में चारों ओर हरियाली बनी हुई है जो सेल की पर्यावरण के प्रति निष्ठा का प्रमाण है। इसकी इस्पात नगरियों के वन्य तथा जीव उद्यानों में विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधे फल-फूल रहे हैं।

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