पर्यावरण प्रबंधन प्रभाग

पर्यावरण से संबंधित पहलुओं के अनुकूल कानूनी और अन्य आवश्यकताओं का पालन करने हेतु सेल अपने ऑपरेशन्‍स का संचालन पर्यावरणीय उत्तरदायी ढंग से करने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी के पर्यावरण सम्बन्धी दृष्टिकोण नीति के सिद्धांतों से लिए गए हैं जो न केवल अनुपालन में रहने की आवश्यकता पर जोर देती है बल्कि आगे बढ़ने का भी प्रयत्न करती है, साझेदार की चिंताओं का समाधान करती है, और सभी साझेदारों के साथ कंपनी की पर्यावरण धारणा के साथ संवाद स्थापित करती है।

विभिन्न कार्यों को पर्यावरणीय अनुकूल तरीके से संचालन करने के लिए कई वर्षों से ठोस प्रयास किए गए हैं। जिनके परिणामस्वरूप उत्सर्जन और निर्वाह के स्तर में कमी, ठोस अपशिष्टों के उपयोग और ग्रीन कवर में वृद्धि हुई है।

सेल संयत्रों ने वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को प्रभावी रूप से बरकरार रखा है और दिन-प्रतिदिन कठोर हो रहे मानदंडों को कायम रखने के लिए नियमित रूप से उनकी अपग्रेडिंग कर रहा है। निरंतर प्रयासों के माध्यम से, पिछले पांच सालों में प्रमुख चिमनियों से होने वाले पार्टिक्‍युलेट मैटर (पीएम) के उत्सर्जन में 12% से अधिक की कमी हुई है। चालू विस्तार एवं आधुनिकीकरण परियोजनाओं के एक भाग के रूप में, प्रदूषण और कार्बनडाईऑक्साइड का स्तर कम करने के लिए कई अत्याधुनिक तकनीकों को स्थापित किया जा रहा है। पिछले पांच वर्षों के दौरान, स्‍पेसिफिक कार्बनडाईऑक्साइड के उत्सर्जन को लगभग 5% तक कम किया गया है।

स्‍थापित ई.टी.पी. के प्रभावी उपयोग, जल पुन:प्रचालन प्रणालियों के कायाकल्‍प एवं अन्‍य संचालनीय उद्देश्‍यों के लिए प्रयुक्‍त जल की रिसाइ‍कलिंग द्वारा विभिन्‍न इस्‍पात संयंत्रों के कार्यक्षेत्रों के जल प्रदूषण स्‍तर पर ध्‍यान दिया गया है। ईटीपी से उपचारित अपशिष्ट निस्सारण के निर्धारित मानदंडों को पूरा करने के बाद ही अपशिष्ट को आउटफॉल्‍स के माध्यम से संयंत्र की बाउंड्री के बाहर छोड़ा जाता है। पिछले पांच वर्षों में स्‍पेसिफिक अपशिष्ट का निकास भार 27% तक घट गया है। सभी संयंत्रों में निर्धारित मानदंडों के अनुसार आउटफॉल्‍स के माध्यम से निकास की गुणवत्ता अच्छी तरह से बरकरार है।    

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन

इस्पात निर्माण से जुड़े अपशिष्टों का प्रबंधन करने के लिए सेल ने अपशिष्ट न्यूनीकरण रणनीतियों को प्रभावी रूप से अपनाया है, जिसमें संचालनों आदि में स्रोत पर संरक्षण, चार 'आर' के सिद्धांत (रिड्यूस, रिकवर, रिसाइकिल और रियूज़) का एकीकरण शामिल हैं। वर्ष 2016-17 में ठोस अपशिष्ट का उपयोग 83.20% था।

 

पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली
सेल ने अपने संयंत्रों और खदानों में उत्तरोत्तर आईएसओ 14001 प्रमाणीकरण को अंगीकृत किया है जिसके परिणामस्‍वरूप बेहतर अपशिष्‍ट प्रबंधन, जल एवं ऊर्जा संरक्षण, ध्‍वनि प्रदूषण में कमी, चिमनी एवं अज्ञात उत्‍सर्जन पर नियंत्रण, बेहतर गृह व्‍यवस्‍था, बेहतर कार्यक्षेत्र वातावरण आदि हासिल हुए हैं। सेल की निम्‍नलिखित इकाइयां ईएमएस-आईएसओ 14001 के लिए मान्‍यताप्राप्‍त हैं: 
सीएमओ के अधीन बैंगलोर और बोकारो के भण्‍डारगृहों को वर्ष 2016-17 के दौरान ईएमएस-आईएसओ 14001:2015 की मान्यता के लिए सिफारिश की गई है।

संयंत्र / इकाइयों

प्रमाणन की स्थिति

बीएसपी

संपूर्ण संयंत्र और टाउनशिप

डीएसपी

संपूर्ण संयंत्र

आरएसपी

सिलिकॉन स्टील मिल, सिंटर संयंत्र II, हॉट स्ट्रिप मिल, प्लेट मिल, ईआरडब्ल्यू पाइप संयंत्र, एसडब्ल्यू पाइप संयंत्र, विशेष प्लेट संयंत्र, ईईडी और आरएसपी टाउनशिप

बीएसएल

संपूर्ण संयंत्र

एसएसपी

संपूर्ण संयंत्र और टाउनशिप

एएसपी

संपूर्ण संयंत्र

वीआईएसएल

संपूर्ण संयंत्र

सीएफपी

संपूर्ण संयंत्र

सीएमओ

फरीदाबाद, दानकुनी,कालाम्बोली,चेन्नई,हैदराबाद, अहमदाबाद, गाजियाबाद, दिल्ली, दुर्गापुर, विजाग, बंगलौर और बोकारो में स्थित भण्‍डारगृह

परिवहन और शिपिंग

बीएसटीओ विजाग

खान  

प्रमाणन की स्थिति

दल्ली लौह अयस्क खान

संपूर्ण खान

किरुबुरु लौह अयस्क खान

संपूर्ण खान

मेघहातूबुरु लौह अयस्क खान

संपूर्ण खान

बोलानी अयस्क खान

संपूर्ण खान

कुटेश्वर लाइम स्टोन की खान

संपूर्ण खान

बरसुआ लौह अयस्क खान

संपूर्ण खान

 

हरियाली के लिए प्रयास

सेल के संयंत्रों एवं इकाइयों ने हरित क्षेत्रों, बगीचों, साफ-सुथरे एवं हरे-भरे परिवेशों तथा कतारबद्ध वृक्षों वाले रास्‍तों और टाउनशिप्‍स के विकास के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग करते हुए व्‍यापक वृक्षारोपण कार्यक्रम शुरू किए हैं। ये हरित क्षेत्र धूल-मिट्टी, शोर के प्रभावी अवरोधक के रूप में कार्य करते हैं और कार्बन-डाइ-ऑक्‍साइड को सोंखने का काम करते हैं। सेल इकाइयां प्रति वर्ष व्‍यापक वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाती हैं। 2016-17 के दौरान सेल संयंत्रों और खदानों में और उनके आसपास 2.10 लाख पौधों को रोपा गया है।

पारस्थितिकी-की पुनर्बहाली के प्रयास
जैव विविधता को बढ़ाने तथा बनाए रखने के साथ ही पारिस्थितिकी सेवाओं की पुन:पूर्ति हेतु खराब हुए पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्स्‍थापना और पुनर्वासन आवश्‍यक है। खराब हुए पारिस्थितिकी तंत्रों की पुनर्स्‍थापना और पुनर्वासन पर एक परियोजना पूर्णपानी चूनापत्‍थर खदान एवं डोलोमाइट खदान में कार्यान्वित की गई है जहां उत्‍खनित क्षेत्र की उत्‍पादक पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में सफलतापूर्वक फिर से बहाली कर दी गई है। चूना-पत्‍थर उत्‍खनित और अब पारिस्थितिकी रूप से पुनर्स्‍थापित इस क्षेत्र और जलाशय के दीर्घावधि रख-रखाव का काम दिसंबर, 2014 में शुरू हुआ। इस परियोजना की अ‍वधि 5 वर्ष है और इसका उद्देश्‍य स्‍थानीय समुदायों को पारिस्थितिकी सेवाएं और सामग्रियां उपलब्‍ध करवाते हुए पुनर्स्‍थापित पारिस्थितिकी तंत्रों की सस्‍टेनेबिलिटी बनाए रखना है।

2016-17 के दौरान इस चालू परियोजना के एक भाग के रूप में विभिन्‍न देशी पौधों की जातियों के 10,000 से अधिक पौधे और 2000 औषधीय पौधों को रोपा गया। पशुपालन, मधुमक्‍खी पालन और मत्‍स्‍य पालन के व्‍यवसाय पर पूर्णपानी और आसपास के गांवों के लगभग 100 ग्रामीणों (अधिकांश आदिवासी समुदाय) को भी प्रशिक्षण प्रदान किया गया था। 

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