वित्त वर्ष 2015-16 की चौथी तिमाही - अंकेक्षित वित्तीय परिणाम

City Name: 
New Delhi
Release Date: 
Mon, 05/30/2016 - 13:00
  • वित्त वर्ष 2015-16 की चौथी तिमाही 37.9 लाख टन का रिकार्ड विक्रेय, पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुक़ाबले 20% अधिक
  • वित्त वर्ष 2015-16 की चौथी तिमाही के दौरान EBIDTA तीसरी तिमाही के मुक़ाबले 26% सुधार
  • पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुक़ाबले वार्षिक विक्रय 122 लाख टन रहा, जो 3.6% की बढ़ोत्तरी है
  • वित्त वर्ष 2015-16 की चौथी तिमाही के साथ-साथ तीसरी तिमाही में नई मिलों से विक्रेय इस्पात के उत्पादन में 40% की बढ़ोत्तरी
  • किसी एक वर्ष में अब तक का सबसे अधिक कच्चे इस्पात का उत्पादन

नई दिल्ली, 30 मई, 2016: स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड (सेल) के वित्त वर्ष 2015-16 का अंकेक्षित वित्तीय परिणाम निदेशक मण्डल द्वारा आज रिकार्ड में लिया गया। कंपनी ने वित्त वर्ष 2015-16 की चौथी तिमाही में 37.9 लाख टन का रिकार्ड विक्रेय दर्ज करते हुए हर तरह से निष्पादन में सुधार का गवाह बना, जो कंपनी के किसी भी तिमाही का सर्वाधिक है। इसके साथ ही यह वित्त वर्ष 2015-16 की तीसरी तिमाही से 30% और पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुक़ाबले 20% अधिक है।

निम्न शुद्ध विक्रय प्राप्ति (एनएसआर) के बावजूद मार्च 2016 की तिमाही के दौरान EBIDTA  में दिसंबर 2015 की तिमाही के मुक़ाबले 26% सुधार हुआ है। कंपनी की डेब्ट इक्विटी रेशियो 31 दिसंबर, 2015 के 0.90 से बढ़कर 31 मार्च 2016 को 0.85 हो गई। प्रबंधन द्वारा लागत कम करने और माल प्रबंधन में सुधार लाने की दिशा में की गई पहलों ने वित्तीय मानकों को बेहतर बनाने में योगदान दिया है। वित्त वर्ष 2015-16 की चौथी तिमाही में तीसरी तिमाही के मुक़ाबले प्रति टन विक्रेय इस्पात पर करीब 10% खर्च घट गया, जो उत्पादन लागत में कमी, अधिक मात्रा तथा प्रबंधन पहल की वजह से संभव हुआ।

वित्त वर्ष 2015-16 की चौथी तिमाही में कंपनी का कारोबार 12,612 करोड़ रुपये रहा, जो इसी वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के 9928 करोड़ रुपये से अधिक है। 20% उच्च विक्रय के बावजूद वित्त वर्ष 2015-16 की चौथी तिमाही में कंपनी का कुल कारोबार निम्न शुद्ध विक्रय प्राप्ति के कारण 12612 करोड़ रुपया रहा

जबकि वित्त वर्ष 2015 की इसी अवधि में कंपनी का कुल कारोबार 12886 करोड़ रुपया था। कंपनी का कारोबार वित्त वर्ष 2015-16 में उच्च उत्पादन के बावजूद वित्त वर्ष 2014-15 के 50,627 करोड़ रूपये की तुलना में कम 43337 करोड़ रुपये रहा, जो शुद्ध विक्रय प्राप्ति में गिरावट के चलते दर्ज किया गया।

वित्त वर्ष 2015-16 की चौथी तिमाही में कंपनी को 1230 करोड़ रुपये का घाटा कर अदायगी के बाद हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में कर अदायगी के बाद 334 करोड़ रूपये लाभ हुआ था। यह घाटा शुद्ध प्राप्ति में 19% की गिरावट की वजह से देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2014-15 के 2093 करोड़ रूपये के शुद्ध लाभ के मुक़ाबले वित्त वर्ष 2015-16 में शुद्ध घाटा 4137 करोड़ रूपये रहा, जो शुद्ध विक्रय प्राप्ति में गिरावट, उच्च ब्याज और मूल्य ह्रास प्रभार की वजह से हुआ है।

तकनीकी-आर्थिक निष्पादन में सुधार ने भी समग्र निष्पादन में सहयोग किया है। सेल ने पिछले सर्वश्रेष्ठ 489 किलोग्राम/टन हॉट मेटल के मुक़ाबले, इस तिमाही में 476 किलोग्राम/टन हॉट मेटल सर्वश्रेष्ठ तिमाही कोक रेट दर्ज किया है। सेल ने वित्त वर्ष 2015-16 की तीसरी तिमाही के मुक़ाबले चौथी तिमाही में ब्लास्ट फर्नेस उत्पादकता में 4% और सीडीआई में 10% की बढ़ोत्तरी दर्ज की है।
कंपनी ने वित्त वर्ष 2015-16 की तीसरी तिमाही के मुक़ाबले चौथी तिमाही में वैल्यू एडेड स्टील में 7% की बढ़ोत्तरी दर्ज की है। कंपनी ने अभी तक आयात किए जा रहे यात्री कोच व्हील के विभिन्न प्रकारों का विकास करने के अलावा नई श्रेणी के प्लेट्स और स्ट्रक्चरल (यूनिवर्सल सेक्शन समेत) को भी बनाना शुरू किया है।

इस अवसर पर सेल अध्यक्ष श्री पी के सिंह ने कहा, “सरकार द्वारा सेफगार्ड ड्यूटी और न्यूनतम आयात मूल्य जैसे सहायक नीतिगत उपायों को लागू करने से चुनौतियों सामना कर रहे घरेलू उद्योग को कुछ राहत मिली है। हम वित्त वर्ष 2016 की अंतिम तिमाही में बेहतर वित्तीय परिणाम देख चुके हैं। हम ऊर्जा बचत उपायों, प्रोडक्ट मिक्स में और उत्पादों को शामिल करने और सरकार द्वारा आधारभूत परियोजनाओं पर ज़ोर देने से स्टील की मांग में आने वाली तेजी को पूरा करने के लिए ग्राहक अनुकूल प्रक्रिया स्थापित करने के साथ शेष आधुनिकीकरण और विस्तारीकरण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की दिशा में काम रहे हैं।”

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