आरडीसीआईएस- लोहे एवं इस्पात के लिए अनुसंधान एवं विकास - नियमावली

Page Type

धारा 4 की उपधारा 1 के खण्ड (ख) में उल्लिखित 17 मदें (मेनुअल), जो अधिनियम के कानून बनने के 120 दिन के भीतर प्रत्येक सार्वजनिक संस्था को प्रकाशित करना जरूरी है।

  1. सेल के संगठन, कार्य और कर्तव्यों का विवरण।
  2. अधिकारियों व कर्मचारियों के अधिकार एवं कर्तव्य।
  3. सुपरविजन व उत्तरदायित्व सहित निर्णय की प्रक्रिया के लिए कार्रवाई।
  4. कार्यों के लिए कारखाने द्वारा नियत मानक।
  5. इसके नियंत्रण में तथा उसके पास रखे गए नियम, विनियम, निर्देश, मेनुअल और रिकार्ड जो कर्मचारी अपने कर्तव्य निर्वाहन में प्रयोग करते हैं।
  6. सेल के नियंत्रण में दस्तावेजों की श्रेणी संबंधी वक्तव्य।
  7. जनता से विचार-विमर्श से नीति निर्धारण व उनके कार्यान्वयन के संबंध में व्यवस्था का विवरण।
  8. दो अथवा दो से अधिक व्यक्तियों की ऐसी संस्थाएं, मण्डल, परिषदें, समितियां जो इसे परामर्श देने के लिए गठित की गई हों और क्या इन मण्डलों, परिषदों, समितियों तथा अन्य संस्थाओं में जनता भाग ले सकती है या इनकी बैठकों के संक्षिप्त कार्रवाई विवरण जनता को उपलब्ध हैं ?
  9. सेल के अधिकारियों तथा कर्मचारियों की डायरेक्टरी। 
  10. प्रत्येक अधिकारी तथा कर्मचारी द्वारा प्राप्त मासिक पारिश्रमिक, कम्पनी के नियमों के अन्तर्गत मुआवजे की प्रणाली।
  11. प्रत्येक एजेन्सी को आबंटित बजट, जिसमें सभी योजनाओं का विवरण, प्रस्तावित व्यय तथा किए गए भुगतान का विवरण हो।
  12. सहायता कार्यक्रमों के कार्यान्वयन का तरीका, आबंटित राशि तथा ऐसे कार्यक्रमों से लाभान्वित व्यक्तियों का विवरण।
  13. सेल द्वारा दिए गए/दी गई रियायतें, परमिट, अधिकार का विवरण।
  14. इलेक्ट्रोनिक स्वरूप में इसके पास उपलब्ध सूचना का विवरण।
  15. इलेक्ट्रोनिक स्वरूप में उपलब्ध सूचना के लिए कृपया वेबसाइट  www.sail.co.in देखें।
  16. सूचना प्राप्त करने हेतु जनता के लिए उपलब्ध सुविधाओं का विवरण जिसमें लाइब्रेरी या अध्ययन कक्ष के कार्य घण्टे बताए गए हों (यदि व्यवस्था है तो)। कम्पनी के निगमित कार्यालय में इस प्रकार की कोई सुविधा नहीं है। परन्तु, निगमित कार्य प्रमुख की पूर्व अनुमति से इस्पात भवन के निचले तल पर स्थित लाइब्रेरी के प्रयोग की इजाजत दी जा सकती है।
  17. जन सूचना अधिकारियों के नाम, पद व उनके बारे में अन्य विवरण।
  18. निर्धारित अन्य कोई सूचना तथा प्रति वर्ष इनका नवीनीकरण।

सेल के संगठन, कार्य तथा कर्तव्यों का विवरण

ध्येय:- संगठन की परियोजनाओं और कार्यक्रमों का संयुक्त उद्देश्य-संगठन के समयबद्ध लक्ष्यों को सुदृढ़ करना।

अनुसंधान व विकास परियोजनाएं: गतिविधियों, संसाधनों, उत्तरदायित्वों के सम्बन्ध में पर्याप्त रूप से परिभाषित अनुसंधान एवं विकास योजनाएं तथा आरडीसीआईएस कर्मियों द्वारा कारखानों और/या आरडीसीआईएस प्रयोगशाला में टेक्नोलाॅजी सम्बन्धी आविष्कारों/ज्ञान के लिए समयबद्ध कार्य।

आरडीसीआईएस: लोहे तथा इस्पात के लिए अनुसंधान एवं विकास केन्द्र 
सेल: स्टील अथाॅरिटी आॅफ इण्डिया लिमिटेड
क्यूएमएस: गुणवत्ता प्रबन्धन प्रणाली

संगठन: 

आरडीसीआईएस सेल की एक अनुसंधान एवं विकास इकाई है इसे आईएसओ 9001ः2000 गुणवत्ता प्रबन्धन प्रणाली प्रमाणपत्र प्राप्त है। यह देश में लौह धातु कर्म के क्षेत्र में एक अग्रणी अनुसंधान संगठन है। आरडीसीआईएस सेल के कारखानों को तुरन्त, आविष्कारिक तथा कम लागत वाले अनुसंधान एवं विकास समाधान उपलब्ध कराता है, बेहतर प्रविधियों और उत्पादों का विकास तथा उनका वाणिज्यिक प्रसार करता है; तथा अपने मानव संसाधनों के कौशल व क्षमता का विकास करता है तथा इसको उत्कृष्टता का केन्द्र बनाने के लिए प्रयास करता है। आरडीसीआईएस के प्रमुख प्रयास लागत में कमी, गुणवत्ता में सुधार, सेल के उत्पादों का मूल्य संवर्धन तथा उपभोक्ताओं के पास सेल के उत्पादों के प्रयोग व इंजीनियरी समर्थन की दिशा में है। आरडीसीआईएस विभिन्न संगठनों को टेक्नोलाॅजी सेवाएं भी उपलब्ध करा रहा है।

आरडीसीआईएस के ध्येय के प्रमुख पक्ष हैं: 

  • मौलिकता को प्रोत्साहन, सृजनशीलता को बढ़ावा, तथा सावधानी से चुने गए अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों पर कार्य कर ज्ञान आधार का विस्तार,
  • टेक्नोलाॅजी के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने व बनाए रखने के लिए आरडीसीआईएस के मानव संसाधनों तथा सुविधाओं का विकास,
  • उपभोक्ता संतुष्टि, गुणवत्ता, उत्पादकता, लाभप्रदता तथा उत्पादों को बाजार में लोकप्रिय बनाने के लिए सेल के कारखानों द्वारा किए जा रहे प्रयासों में सहायता देना।

कार्य एवं कर्तव्य:

परियोजना प्रबन्धन 

सेल के कारखानों और यूनिटों को आरडीसीआईएस द्वारा उपलब्ध कराई जा रहीं सेवाएं, मुख्यतः अनुसंधान एवं विकास कार्यों के रूप में हैं। आरडीसीआईएस द्वारा कारखानों/यूनिटों तथा अपने यहां चलाई जा रहीं अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं का प्रभाव क्षेत्र इस प्रकार है: कारखाने का कार्यनिष्पादन एवं सुधार; जांच तथा परामर्शदात्री कार्य; मूल तथा वैज्ञानिक अनुसंधान; उपस्कर एवं उपकरण विकास। दृष्टिकोण तथा लक्ष्य प्राप्ति के लिए कार्य स्पष्ट रूप से परिभाषित होते हैं। कारखाने और आरडीसीआईएस के बीच संयुक्त विचार-विमर्श के उपरान्त परियोजनाएं चुनी जाती हैं और समस्या का समाधान सुझाया जाता है। सेल के कारखाने तथा आरडीसीआईएस में सक्षम अधिकारी से परियोजना की स्वीकृति मिलने पर कार्य किया जाता है। विभिन्न स्तरों पर परियोजना की समीक्षा की जाती है तथा आवश्यकता पड़ने पर कार्य के दौराून भूल सुधार के लिए उपाय भी सुझाए जाते हैं। परियोजना के अन्त में आविष्कार में साझीदार उपभोक्ता की सहमति प्राप्त कर कार्य के परिणामों के दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। आविष्कार के कार्यान्वयन पर भी नजर रखी जाती है।

मानव संसाधन

आरडीसीआईएस ज्ञान पर आधारित एक संगठन है, अतः मानव संसाधन इसकी प्रमुख परिसम्पत्ति है। संगठन में पर्याप्त तथा उपयुक्त मानव संसाधन के विकास के लिए निरन्तर प्रयास किए जाते हैं। कर्मियों का चयन विशेषज्ञता, कौशल तथा अनुभव का ठीक मिश्रण के आधार पर किया जाता है।

प्रयोगशाला सुविधाएं

आरडीसीआईएस लोहे तथा इस्पात टेक्नोलाॅजी के सभी पक्षों के समाधान के लिए कार्य करता है अतः केन्द्र के पास कच्चे माल से लेकर तैयार माल के मूल्यांकन के लिए अति आधुनिक पूर्ण रूप से सुसज्जित प्रयोगशाला है। केन्द्र अपनी सुविधाओं तथा आधारभूत सुविधाओं में सुधार के लिए निरन्तर प्रयास करता रहता है। इसका उद्देश्य अनुसंधान कार्यों में सदैव आगे बना रहना है।

टेक्नोलाॅजी का प्रसार

आरडीसीआईएस टेक्नोलाॅजी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता है। इनका उद्देश्य सेल के इंजीनियरों तथा टेक्नोलाॅजीविदों के ज्ञान व क्षमता में वृद्धि करना है। ये कार्यक्रम विशेष रूप से कारखानों में कार्य करने वालों के लिए होते हैं और इनमें उन्हें टेक्नोलाॅजी संबध्ंाी समस्याओं का समाधान खोजने, समस्याओं का विश्लेषण व समाधान करने का कौशल सिखाया जाता है। इन कार्यक्रमों में इस्पात कारखानों के विभिन्न टेक्नोलाॅजी क्षेत्रों में अनेक विषयों पर विचार होता है। 

उत्पाद विकास

आरडीसीआईएस के कार्यक्षेत्र का एक प्रमुख क्षेत्र विशेष गुणवत्ता वाले नए उत्पादों का विकास है। ये उत्पाद सेल के कारखानों में वर्तमान सुविधाओं से विकसित किए जाते हैं तथा बाद में उनके उपयोग को बिक्री प्रयासों से वाणिज्यिक आधार प्रदान किया जाता है। उत्पाद विकास पर जोर देने से कम्पनी बाजार में अपनी पकड़ तथा अपना अंश बढ़ाने में सफल होती है। 

टेक्नोलाॅजी विपणन 

आरडीसीआईएस अपने यहां विकसित तकनीकी ज्ञान का हस्तांतरण कर विभिन्न संगठनों को टेक्नोलाॅजी सेवाएं भी दे रहा है। ये सेवाएं परामर्शदात्री सेवाओं, विशेषता-प्राप्त परीक्षण सेवाओं तथा ठेके पर अनुसंधान कार्य के रूप में होती हैं। इससे केन्द्र की विश्वसनीयता बढ़ने के साथ-साथ केन्द्र को बाहरी óोतों से आमदनी भी होती है। 

बौद्धिक पूंजी

वर्तमान प्रतियोगी वातावरण में अनुसंधान एवं विकास प्रयासों से प्राप्त परिणामों को सुरक्षित रखना अनिवार्य हो गया है। आरडीसीआईएस यह बौद्धिक सम्पदा अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत पेटेंट तथा काॅपीराइट दर्ज करा कर करती है। केन्द्र में बौद्धिक पूंजी आधार के प्रसार को सदैव प्रोत्साहित किया गया है। 

आसपास के क्षेत्रों का विकास

आरडीसीआईएस समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग की सहायता करना अपना निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व मानता है। यह अपने चारों ओर के निकट क्षेत्रों के लिए योजना बनाता व उन पर कार्य करता हैं इनसे बच्चों, महिलाओं, शारीरिक तौर पर विकलांग व पिछड़े लोगों को लाभ मिल रहा है।

अन्य दस्तावेजों संबंधी संदर्भ

क्र.सं. दस्तावेज विवरण
1. आरडीसीआईएस, सेल का वार्षिक प्रतिवेदन
2. आरडीसीआईएस, सेल का गुणवत्ता मेनुअल

Back to main links

सेल के संगठन, कार्य तथा कर्तव्यों का विवरण

1.0 परिभाषाएं : 

  • आरडीसीआईएस: लोहे एवं इस्पात के लिए अनुसंधान एवं विकास केन्द्र
  • सेल: स्टील अथाॅरिटी आॅफ इण्डिया लिमिटेड
  • आई/सी: इन्चार्ज
  • एचआरडी: मानव संसाधन विकास
  • ओडी: संगठनात्मक विकास

2.0 दस्तावेज का विवरण

2.1 कम्पनी के आर्टिकल्स आॅफ एसोसिएशन के अन्तर्गत निदेशक मण्डल ने कम्पनी के प्रबन्धन के लिए कुछ अधिकार कम्पनी के अध्यक्ष को सौंपे हैं। अध्यक्ष ने अपने कुछ अधिकार आरडीसीआईएस, सेल के प्रबन्धन के लिए निदेशक (तकनीकी) व कार्यकारी निदेशक इंचार्ज, आरडीसीआईएस, रांची को प्रत्यायोजित किए हैं। कार्य की मांग को देखते हुए इमें समय-समय पर परिवर्तन किया गया है। कार्यकारी निदेशक, इंचार्ज, आरडीसीआईएस ने अपने कुछ अधिकार केन्द्र के सुचारू प्रबन्धन के उद्देश्य से आरडीसीआईएस के कार्यपालकों को सौंप दिए हैं। गोपनीय होने के कारण निदेशक (तकनीकी)/कार्यकारी निदेशक इंचार्ज, आरडीसीआईएस के वित्तीय अधिकारों की जानकारी नहीं दी जा रही है। विभिन्न कार्यपालकों को सहज रूप से प्रशासनिक कार्य चलाने के लिए प्रत्यायोजित अधिकारों की जानकारी केन्द्र के सम्बद्ध दस्तावेजों में उपलब्ध है।

2.2 आरडीसीआईएस के टेक्नोलाॅजी संबंधी कार्य 6 क्षेत्रों: ”कोयला”, ”लोहा”, ”इस्पात”, ”उत्पाद”, ”रोलिंग टेक्नोलाॅजी” और “आॅटोमेशन एवं इंजीनियरी” में विभाजित हैं।

तकनीकी क्षेत्रों में निम्न गतिविधियां की जाती हैं:

  • इस्पात कारखानों में तकनीकी परियोजनाएं: तैयार करना, समीक्षा करना तथा माॅनिटर करना, खरीद कार्य, परीक्षण व जांच, आंकड़े अन्वेषण तथा कार्य पूर्ण होने की रिपोर्ट।
  • आरडीसीआईएस में मूल अनुसंधान: तैयार करना, समीक्षा, परीक्षण, आंकड़े अन्वेषण तथा कार्य पूरी होने की रिपोर्ट।
  • उपस्करों का पर्याप्त रखरखाव: अंश शोधन, निरोधक रखरखाव।
  • उपभोक्ताओं की शिकायतों परकार्य तथा जब भी आवश्यक हो, उन्हें सेवाएं उपलब्ध कराना/आरडीसीआईएस के सभी इस्पात कारखानों में केन्द्र है तथा इसकी प्राथमिक गतिवधियों के लिए टेक्नोलाॅजी समर्थन उपलब्ध कराते हैं। यह निम्न प्राथमिक गतिविधियों में भाग लेता है।
  • परियोजना से संबंधित सभी गतिविधियों में केन्द्र की ओर से कारखाने के साथ सम्पर्क।
  • जब भी आवश्यक हो उपभोक्ताओं को सेवाएं। आरडीसीआईएस में अन्य सह विभाग हैं: ”कार्मिक एवं प्रशासन (पी एण्ड ए)“, ”वित्त एवं लेखा (एफ एण्ड ए)“, ”सामग्री प्रबन्धन (एमएम)“ और ”संचार“।

2.3 कार्मिक एवं प्रशासन निम्न प्राथमिक कार्य करता है:

  • प्रभावी जनशक्ति आयोजन व नियंत्रण सुनिश्चित करना।
  • सार्थक कार्य वातावरण तैयार करना।
  • प्रभावी एचआरडी/ओडी पहल का कार्यान्वयन।
  • कल्याण तथा खेल-कूद गतिविधियों को बढ़ावा।
  • कार्यालय भवन तथा नगरी में प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना।
  • नगरी/सम्पदा संबंधी गतिविधियों पर नजर रखना।
  • रांची स्थित सेल की सभी यूनिटों को कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराना।
  • राजभाषा प्रचार-प्रसार।
  • अनुशासन संबंधी मामलों पर नजर व समीक्षा।

2.4 सामग्री प्रबन्धन निम्न प्राथमिक कार्य करता है:

  • आरडीसीआईएस द्वारा, पूर्व निर्धारित समय सीमा में भारत तथा विदेश से विभिन्न योजनाओं के लिए परियोजना जानकारी प्राप्त करना।
  • कार्यालय उपकरण तथा उपभोग वाले सामान की खरीद।
  • विभिन्न प्रयोगशालाओं द्वारा मांगे गए उपकरण व उपभोग सामग्री की खरीद।
  • आरडीसीआईएस द्वारा मांगी गई विभिन्न सेवाओं के लिए ठेकों को अन्तिम रूप देना।
  • यह सुनिश्चित करना कि कम्पनी में समय-समय पर लागू प्रक्रियाओं के अनुसार खरीद कार्य किए जाते हैं।
  • माल का प्रयोग से पूर्व निरीक्षण, उठाने-रखने, भण्डारण और उसे खराब होने से बचाए रखना।
  • विभिन्न रिकार्डों का रखरखाव।
  • आवश्यकता अनुरूप प्रबन्धन को सूचनाएं उपलब्ध कराना।
  • सामग्री प्रबन्धन विभाग में कर्मचारियांे की प्रशिक्षण आवश्यकताआंे का पता लगाना।
  • सामग्री प्रबन्धन विभाग के कर्मचारियों को दिए गए प्रशिक्षण की उपयोगिता का मूल्यांकन।
  • प्रयोग से पूर्व माल उठाने-रखने, उसके भण्डारण व उसे बचा कर रखना।

2.5 वित्त तथा लेखा विभाग निम्न कार्य करता है:-

सामान्य 

  • यूनिट की वित्तीय आवश्यकताओं की निरन्तर समीक्षा।

बजट

  • समूहों/विभागों से विचार-विमर्श के उपरान्त पूंजी तथा राजस्व बजट को अन्तिम रूप देना।
  • परियोजनाओं/व्यय/आय मदों की समय-समय पर बजट-समीक्षा। जहां भी भिन्नता पाई जाए वह सबके सामने लाना तथा उसे ठीक करने के उपायों के बारे में सुझाव देनां

लागत पर नियंत्रण

  • समूहों/विभागों से विचार-विमर्श के उपरान्त यूनिट में लागत में कमी करने की योजनाओं तथा लक्ष्यों का निर्धारण व पूरी यूनिट में योजनाएं लागू करना व सुनिश्चित करना।
  • सम्बद्ध समूहों/विभागों से बातचीत कर विभिन्न लागत मदों (परियोजनाएं, जनशक्ति, सामग्री, परामर्शदात्री सेवाएं) की निरंतर समीक्षा और समय रहते भूल सुधार के लिए कार्रवाई।

निधियों की आवश्यकता

  • निगमित कार्यालय से निधि की मांग तथा आवश्यकता व उपयोगिता के आधार पर पूंजी और राजस्व के लिए निधियों के आबंटन को स्वीकृति।
  • आबंटित निधियों का प्रभावी उपयोग तथा पैसे के उपयोग के लिए पूरे संगठन में उपयुक्त अनुशासन सुनिश्चिित करना।

वित्तीय लेखे, कराधान और लेखा परीक्षा

  • रांची स्थित यूनिटों तथा आरडीसीआईएस के खाते समय पर बन्द करना। संवैधानिक लेखा परीक्षा, वाणिज्यिक लेखा परीक्षा संबंधी सभी मामले तथा कानून की व्यवस्थाओं के अनुसार निदेशक मण्डल और शेयरधारकों की स्वीकृति के लिए सेल के खातों में समावेश हेतु समय पर इन्हें निगमित कार्यालय भेजना।
  • एक ऐसी प्रणाली का विकास करना और उसकी देखरेख करना जिसे यूनिट के कार्य में सुधार के तरीकों की सिफारिश की जा सके तथा सभी संसाधनों का पूर्ण उपयोग सम्भव हो।
  • निगमित कार्यालय के कराधान विभाग को रांची स्थित यूनिटों की लेखा परीक्षित कर रिपोर्ट भेजना जिससे कम्पनी के ‘कर रिटर्न’ समय पर दाखिल किए जा सकें। इनमें आयकर, सेवा कर, उत्पादन शुल्क, सीमा शुल्क, बिक्री कर, शुल्क राॅयल्टी आदि शामिल हैं।
  • यूनिट के सभी संवैधानिक दायित्वों का पालन करना।

अन्य

  • कर्मियों को वित्त विभाग के कार्यों का प्रशिक्षण दिलाना तथा वित्त विभाग के अधिकारियों को आवश्यकता अनुरूप प्रशिक्षण/गोष्ठियों/कार्यशालाओं में भेजना।
  • टेक्नोलाॅजी विपणन/परियोजना एवं समन्वयन/खरीद जैसे सम्बद्ध विभागों को वित्तीय लेन-देन से सम्बन्धित नीतियों के बारे में निर्णय लेने में सहायता देना।
  • नीति और प्रत्यायोजित अधिकार के अनुसार बट्टे खाते में डालने और परिसम्पत्तियों की बिक्री के सम्बन्ध में सहायता।
  • आरडीसीआईएस व्यय तथा आरडीसीआईएस सेवाओं की बिक्री की मदों में वित्त विभाग की स्वीकृति प्रदान करना।

Back to main links

सुपरविजन व उत्तरदायित्व सहित निर्णय की प्रक्रिया के लिए कार्रवाई

परिभाषा: 

आरडीसीआईएस: लोहे तथा इस्पात के लिए अनुसंधान एवं विकास केन्द्र

  • ईडी (डब्ल्यू): कार्यपालक निदेशक (वक्र्स)
  • जीएम (डब्ल्यू): महाप्रबन्धक (वक्र्स)
  • एचओडी: डिवीजन का प्रमुख
  • सुपरविजन व उत्तरदायित्व सहित निर्णय लेने की प्रक्रिया के लिए कार्रवाई।

परियोजना तैयार करने, चयन के सम्बन्ध में निर्णय की प्रक्रिया तथा आरडीसीआईएस में स्वीकृति के लिए निश्चित प्रक्रिया है। परियोजना का प्रस्ताव कार्यदल (जिसे परियोजना पर कार्य करना है) के प्रवक्ता द्वारा उपभोक्ता कारखाने से विचार-विमर्श के बाद प्रस्तुत किया जाता है। प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर रखा जाता है और अन्त में सम्बद्ध परियोजना स्वीकृति समिति (पीएसी) परियोजना की प्रस्तुति पर गहन विचार के बाद इसकी सिफारिश करती है। मुख्य कार्यकारी अंततः इसका अनुमोदन करता है।

परियोजना पर कार्य के समय, सम्बद्ध डिविजन प्रमुख द्वारा नियमित समीक्षा के अतिरिक्त निम्न में भी इस पर विचार होता है।

  • समीक्षा समिति द्वारा रांची में आयोजित तिमाही निष्पादन समीक्षा (क्यू.आर.पी.) में।
  • उपभोक्ता कारखाने के कार्यपालक निदेशक (डब्ल्यू)/जीएम (डब्ल्यू) की कारखाना समीक्षा समिति की बैठक में।
  • मुख्य कार्यकारी निदेशक भी समय-समय पर सभी परियोजनाओं के प्रमुख मुद्दों पर विचार करते हैं।

Back to main links

कार्यों के लिए सेल द्वारा नियत मानक

आरडीसीआईएस का प्रमुख कार्य लोहे तथा इस्पात उद्योग के क्षेत्र में अनुसंधान परियोजनाओं पर कार्य करना है। कार्मिक, वित्त और सामग्री प्रबन्धन जैसे सहायक क्षेत्र इनमें अपने-अपने कार्यों से सहयोग देते हैं। अपने विभिन्न कार्यों के संचालन में निम्नलिखित दस्तावेजों में नियत मानकों का पालन किया जाता है:

  1. तकनीकी मामलों के लिए: गुणवत्ता मेनुअल में बताई गई प्रक्रिया व मार्गदर्शी सिद्धान्त। 
  2. कार्मिक मामलों के लिए: सेल निगमित कार्यालय द्वारा जारी कार्मिक मेनुअल तथा आरडीसीआईएस के स्थायी आदेश।
  3. सामग्री प्रबन्धन के लिए: खरीद प्रक्रिया 2000 में बताए गए मार्गदर्शी सिद्धान्त।
  4. वित्तीय मामलों के लिए: लेखा मेनुअल में बताए गए मार्गदर्शी सिद्धान्त।

Back to main links

इसके नियंत्रण में तथा उसके पास रखे गए नियम, विनियम, निर्देश, मेनुअल और रिकार्ड जो कर्मचारी अपने कर्तव्य निर्वाहन में प्रयोग करते हैं

आरडीसीआईएस के पास अपने कार्यों के लिए रखे नियम, विनियम, निदे्रश, मेनुअल और रिकार्ड निम्न दस्तावेजों में हैं:

  • कार्मिक मेनुअल
  • प्रक्रिया मेनुअल
  • लेखा मेनुअल
  • बोली लगाने के लिए मानक मेनुअल
  • खरीद प्रक्रिया 2000
  • वार्षिक प्रतिवेदन
  • परियोजनाओं के विस्तृत अंश
  • समय-समय पर जारी मार्गदर्शी सिद्धान्त/संशोधन

Back to main links

सेल के नियंत्रण में दस्तावेजों की श्रेणी संबंधी वक्तव्य

संगठन का कार्य सुचारू रूप से चलाने के लिए दस्तावेजों की निम्न श्रेणियां सेल के पास हैं:

  1. तकनीकी रिकार्ड: परियोजना पूरी होने पर रिपोर्ट
  2. कार्मिक रिकार्ड: कर्मचारियों से सम्बद्ध रिकार्ड
  3. सामग्री प्रबन्धन रिकार्ड: खरीद संबंधी रिकार्ड
  4. वित्तीय रिकार्ड: वित्तीय लेन-देन तथा व्यय संबंधी रिकार्ड 
  5. श्रेणी 2, 3 और 4 में बताए गए रिकार्ड गोपनीय हैं।

Back to main links

जनता से विचार-विमर्श से नीति निर्धारण व उनके कार्यान्वयन के संबंध में व्यवस्था का विवरण

नीतियों के निर्धारण व उनके कार्यान्वयन में जनता से विचार-विमर्श या इसमें उनके प्रतिनिधित्व। 

इसके लिए आरडीसीआईएस में कोई व्यवस्था नहीं है।

Back to main links

दो अथवा दो से अधिक व्यक्तियों की ऐसी संस्थाएं, मण्डल, परिषदें, समितियां जो इसे परामर्श देने के लिए गठित की गई हों और क्या इन मण्डलों, परिषदों, समितियों तथा अन्य संस्थाओं में जनता भाग ले सकती है या इनकी बैठकों के संक्षिप्त कार्रवाई विवरण जनता को उपलब्ध हैं

दो अथवा दो से अधिक व्यक्तियों की ऐसी संस्थाएं, मण्डल, परिषद, समितियां जो इसे परामर्श देने के लिए गठित की गई हों और क्या इन मण्डलों, परिषदों, समितियों अथवा अन्य संस्थाओं में जनता भाग ले सकती है या इनकी बैठकों का संक्षिप्त कार्रवाई विवरण जनता को उपलब्ध है।

”गैर कार्यपालक कर्मचारियों के मजदूर संघ“ तथा ”एसोसिएशन आॅफ स्टील एक्जीक्यूटिव्स“ के प्रतिनिधियों के साथ आंतरिक द्विपक्षीय समितियां गठित की गई हैं।

इन द्विपक्षीय समितियों की समय-समय पर बैठकें आयोजित की जाती हैं। परन्तु ये अथवा इनका कार्य-वृत्तान्त जनता के लिए नहीं है। 

Back to main links

सेल-आरडीसीआईएस अधिकारियों तथा कर्मचारियों की डायरेक्टरी

केन्द्र के सभी अधिकारियों तथा कर्मचारियों की पूरी सूची केन्द्र के कार्मिक विभाग के पास उपलब्ध है।

Back to main links

प्रत्येक अधिकारी तथा कर्मचारी द्वारा प्राप्त मासिक पारिश्रमिक, कम्पनी के नियमों के अन्तर्गत मुआवजे की प्रणाली

केन्द्र के प्रत्येक अधिकारी तथा कर्मचारी को प्राप्त मासिक पारिश्रमिक तथा मुआवजे की प्रणाली इस प्रकार है:

सभी कर्मचारी श्रेणी एस 1-एस 11 और ई 0-ई 9 के अन्तर्गत निम्नानुसार आते हैं:

गैर-कार्यपालक कार्यपालक
श्रेणी वेतनमान श्रेणी वेतनमान
एस-1 4000-80-5600 ई-O 8600-250-14600
एस-2 4000-86-4682-91-5865 ई-1 10750-300-16750
एस-3 4170-93-4821-98-6095 ई-2 13700-350-18250
एस-4 4300-104-5028-110-6458 ई-3 16000-400-20800
एस-5 4500-118-5326-126-6964 ई-4 17500-400-22300
एस-6 4800-133-5731-140-7551 ई-5 18500-450-23900
एस-7 5100-148-6136-156-8164 ई-6 19000-450-24400
एस-8 5400-163-6541-170-8751 ई-7 19500-450-25350
एस-9 5800-179-7053-186-9471 ई-8 20500-500-26500
एस-10 6400-200-11400 ई-9 23750-600-28550
एस-11 7500-230-13250    

पारिश्रमिक एवं मुआवजा कम्पनी के निर्देशों के अनुसार हैं। 

प्रत्येक कर्मचारी को प्राप्त मासिक पारिश्रमिक व मुआवजे का विवरण वित्त विभाग के पास उपलब्ध है।

Back to main links

प्रत्येक एजेन्सी को आबंटित बजट, जिसमें सभी योजनाओं का विवरण, प्रस्तावित व्यय तथा किए गए भुगतान का विवरण हो

आरडीसीआईएस के लिए 2005-06 का पूंजीगत बजट 5 करोड़ रुपये है।

30-9-2005 तक किया गया व्यय 1.47 करोड़ रुपये है।

Back to main links

सहायता कार्यक्रमों के कार्यान्वयन का तरीका, आबंटित राशि तथा ऐसे कार्यक्रमों से लाभान्वित व्यक्तियों का विवरण

सहायता कार्यक्रमों पर कार्रवाई का तरीका, आबंटित राशि तथा ऐसे कार्यक्रम से लाभान्वित व्यक्तियों का विवरण आरडीसीआईएस पर लागू नहीं।

Back to main links

सेल द्वारा दिए गए/दी गई रियायतें, परमिट, अधिकार का विवरण

केन्द्र द्वारा दी गई रियायतों, परमिट या अधिकार का विवरण।

आरडीसीआईएस में रियायत और परमिट देने का प्रणाली नहीं है।

पेटेन्ट अटार्नियों को आरडीसीआईएस की ओर से पेटेन्ट/काॅपीराइट दायर करने का अधिकार प्रदान किया जाता है।

Back to main links

इलेक्ट्रोनिक स्वरूप में इसके पास उपलब्ध सूचना का विवरण।

इलेक्ट्रोनिक स्वरूप में इसके पास उपलब्ध सूचना का विवरण 

कम्पनी की सूचना इलेक्ट्रोनिक स्वरूप में वेबसाइट www.sail.co.in पर उपलब्ध है।

Back to main links

सूचना प्राप्त करने हेतु जनता के लिए उपलब्ध सुविधाओं का विवरण जिसमें लाइब्रेरी या अध्ययन कक्ष के कार्य घण्टे बताए गए हों (यदि व्यवस्था है तो)

सूचना प्राप्त करने हेतु जनता के लिए उपलब्ध सुविधाओं का विवरण जिसमें लाइब्रेरी या अध्ययन कक्ष के कार्य घण्टे बताए गए हों (यदि व्यवस्था है तो)

आरडीसीआईएस में इस प्रकार की सुविधा जनता के लिए उपलब्ध नहीं है।

Back to main links

जन सूचना अधिकारियों के नाम, पद व उनके बारे में अन्य विवरण

1.0 परिभाषाएं:

  • पीआईओ: जन सूचना अधिकारी
  • एपीआईओ: सहायक जन सूचना अधिकारी
  • 2.0 दस्तावेज का विवरण
  • जनसूचना अधिकारियों के नाम, पदनाम तथा अन्य विवरण:
  • जन सूचना अधिकारी: श्री मुकुल अखोरी
  • मुख्य कार्मिक प्रबन्ध
  • आरडीसीआईएस, सेल, रांची-834002
  • टेलीफोन: 0651-2411080
  • सहायक जन सूचना अधिकारी: श्री शशि भूषण सहाय
  • वरिष्ठ प्रबन्धक (राजभाषा)
  • आरडीसीआईएस, सेल, रांची-834002
  • टेलीफोन: 0655-2411085

Back to main links

निर्धारित अन्य कोई सूचना तथा प्रति वर्ष इनका नवीनीकरण

जल्दी ही प्रस्तुत की जाएगी।

Back to main links

Set Order: 
10
Go to Top
Copyright © 2012 SAIL, all rights reserved
Designed & Developed by Cyfuture