इंजीनियरी एवं टेक्नोलॉजी केन्द्र - नियमावली

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धारा 4 की उपधारा 1 के खण्ड (ख) में उल्लिखित 17 मदें (मेनुअल), जो अधिनियम के कानून बनने के 120 दिन के भीतर प्रत्येक सार्वजनिक संस्था को प्रकाशित करना जरूरी है।

  1. सेल के संगठन, कार्य और कर्तव्यों का विवरण।
  2. सेट के अधिकारियों व कर्मचारियों के अधिकार एवं कर्तव्य।
  3. सुपरविजन व उत्तरदायित्व सहित निर्णय की प्रक्रिया के लिए कार्रवाई।
  4. कार्यों के लिए सेल द्वारा नियत मानक।
  5. सेल द्वारा अपने नियंत्रण में रखे गए नियम, विनियम, निर्देश, मेनुअल और रिकार्ड जो कर्मचारी अपने कर्तव्य निर्वाहन में प्रयोग करते हैं।
  6. सेल के नियंत्रण मे दस्तावेजों की श्रेणी संबंधी वक्तव्य।
  7. जनता से विचार-विमर्श से नीति निर्धारण व उनके कार्यान्वयन के संबंध में व्यवस्था का विवरण। 
  8. दो अथवा दो से अधिक व्यक्तियों की ऐसी संस्थाएं, मण्डल, परिषदें,समितियां जो इसे परामर्श देने के लिए गठित की गई हों और क्या इन मण्डलों, परिषदों, समितियों तथा अन्य संस्थाओं में जनता भाग ले सकती है या इनकी बैठकों के संक्षिप्त कार्रवाई विवरण जनता को उपलब्ध हैं \ 
  9. सेल के अधिकारियों तथा कर्मचारियों की डायरेक्टरी।
  10. प्रत्येक अधिकारी तथा कर्मचारी द्वारा प्राप्त मासिक पारिश्रमिक, कम्पनी के नियमों के अन्तर्गत मुआवजे की प्रणाली। 
  11. प्रत्येक एजेन्सी को आबंटित बजट, जिसमें सभी योजनाओं का विवरण, प्रस्तावित व्यय तथा किए गए भुगतान का विवरण हो।
  12. सहायता कार्यक्रमों के कार्यान्वयन का तरीका, आबंटित राशि तथा ऐसे कार्यक्रमों से लाभान्वित व्यक्तियों का विवरण।
  13. सेल द्वारा दिए गए/दी गई रियायतें, परमिट, अधिकार का विवरण। 
  14. इलेक्ट्रोनिक स्वरूप में इसके पास उपलब्ध सूचना का विवरण।
    इलेक्ट्रोनिक स्वरूप में उपलब्ध सूचना के लिए कृपया वेबसाइट www.sail.co.inदेखें।
  15. सूचना प्राप्त करने हेतु जनता के लिए उपलब्ध सुविधाओं का विवरण जिसमें लाइब्रेरी या अध्ययन कक्ष के कार्य घण्टे बताए गए हों (यदि व्यवस्था है तो)। कम्पनी के निगमित कार्यालय में इस प्रकार की कोई सुविधा नहीं है। परन्तु, निगमित कार्य प्रमुख की पूर्व अनुमति से इस्पात भवन के निचले तल पर स्थित लाइब्रेरी के प्रयोग की इजाजत दी जा सकती है। 
  16. जन सूचना अधिकारियों के नाम, पद व उनके बारे में अन्य विवरण।
  17. निर्धारित अन्य कोई सूचना तथा प्रति वर्ष इनका नवीनीकरण।

संगठन, कार्य तथा कर्तव्यों का विवरण

28 जनवरी 1982 को आयोजित सेल निदेशक मण्डल की 83वीं बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार 1982 में इंजीनियरी तथा टेक्नोलाॅजी केन्द्र (सेट) का गठन किया गया। सेल संगठन में सेट डिजाइन] इंजीनियरी तथा परामर्शदात्री सेवाएं उपलब्ध कराने वाला एक यूनिट है। यह सेल के कारखानों तथा यूनिटों के भीतर लोहे तथा इस्पात से सम्बद्ध टेक्नोलाॅजियां अधिग्रहण तथा हस्तांतरण करने वाली एक प्रमुख एजेन्सी है। सेट परिकल्पना] परियोजना रिपोर्ट] परियोजना मूल्यांकन तथा समीक्षा] परियोजनाओं के संबंध में परामर्शदात्री सेवाएं] डिजाइन व इंजीनियरी तथा परियोजना प्रबन्धन जैसी विविध सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। सेट लोहे तथा इस्पात निर्माण तथा सह क्षेत्रों] जैसे खान आयोजन और विकास] आधारभूत सुविधाओं का विकास] औद्योगिक पाइपिंग] औद्योगिक भण्डारण] माल उठाने-रखने की प्रणाली] औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण तथा पर्यावरण प्रबन्धन प्रणाली] जल आपूर्ति व सफाई] नगर आयोजन] छोटी बिजली परियोजनाओं आदि क्षेत्रों में सेवाएं प्रदान कर रहा है। 

सेट के निम्न स्थानों पर केवल दो यूनिट कार्यालय हैं जो इसकी गतिविधियों में समन्वयन करते हैं।

1. सेट] दिल्ली यूनिट कार्यालय
2. सेट] कोलकाता यूनिट कार्यालय

यह आईएसओ 9001:2000 प्रमाणित संगठन है।
सेट के उद्देश्यों तथा कार्यों को मुख्यतः निम्न शीर्ष में रखा जा सकता है: 

•डिजाइन] इंजीनियरी तथा तकनीकी-आर्थिक
• टेक्नोलाॅजी सुधार
• अन्य सेवाएं

1.1.1 डिजाइन] इंजीनियरी तथा तकनीकी-आर्थिक

कारखानों या निगमित कार्यालय द्वारा सौंपी गई विभिन्न योजनाओं/परियोजनाओं के बारे में विस्तृत तकनीकी अध्ययन। 

तकनीकी] टेक्नोलाॅजी विषयक तथा टेकनाॅ-आर्थिक पक्षों के संबंध में साध्यता तथा विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करना] जिससे कारखाने व यूनिट निवेश प्रस्ताव तैयार कर सकें।

स्वीकृत योजनाओं तथा प्रस्तावों को कार्यान्वित करने के लिए विस्तृत इंजीनियरी सहायता उपलब्ध कराना] तकनीकी मानक तैयार व आर्डर करना] कारखानों को निविदाओं का मूल्यांकन करने तथा उन्हें अन्तिम रूप देने में सहायता देने और डिजाइनरों के काम का सुपरविजन। .

समीक्षा/स्वीकृति के समय प्रस्तावों के समर्थन में कारखानों व यूनिटों की सहायता। 

• स्वीकृत योजनाओं तथा प्रस्तावों को कार्यान्वित करने के लिए विस्तृत इंजीनियरी सहायता उपलब्ध कराना] तकनीकी मानक तैयार व आर्डर करना] कारखानों को निविदाओं का मूल्यांकन करने तथा उन्हें अन्तिम रूप देने में सहायता देने और डिजाइनरों के काम का सुपरविजन। 
• आरम्भिक अनुसंधान एवं विकास अध्ययन के पश्चात् सफल पाई गई सभी योजनाओं को कारखानों में लागू करने के लिए विस्तृत इंजीनियरिंग तथा निवेश प्रस्ताव तैयार करना तथा उन पर कार्य का समन्वयन। 
• बाहरी इंजीनियरी तथा तकनीकी परामर्शदाताओं के कार्य में समन्वयन।

1.1.2 टेक्नोलाॅजी में सुधार

• विभिन्न प्रविधियों में अनुसंधान एवं विकास केन्द्र से परामर्श के बाद टेक्नोलाॅजी में सुधार उपायों की पहचान तथा विभिन्न कारखानों में उन्हें लागू करने की योजना बनाना तथा इसके लिए डिजाइन व तकनीकी ज्ञान क्षमता हासिल करना। 
• लघुकालीन/दीर्घकालीन निगमित उत्पादन लक्ष्यों के लिए उपयुक्त निवेश की जानकारी देते हुए अनुसंधान एवं विकास केन्द्र को विभिन्न उत्पादन प्रविधि मार्गों] उत्पादन सुविधाओं की पहचान में सहायता उपलब्ध कराना।

1.1.3 अन्य सेवाएं

• कम्पनी के मानकों का विकास और राष्ट्रीय तथा अन्तर-कारखाना मानकीकरण संगठनों से समन्वयन।

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अधिकारियों व कर्मचारियों के अधिकार एवं कर्तव्य

2.1 अधिकार

सेट सेल की भीतरी डिजाइन] इंजीनियरी तथा तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराने वाला एक यूनिट है] अतः इसके कार्यपालकों को सेल अधिक्रम से अधिकार प्राप्त होते हैं।

2.1.1 Tसेल निदेशक मण्डल को प्रत्यायोजित अधिकार

स्टील अथाॅरिटी आॅफ इण्डिया लिमिटेड (सेल) कम्पनी अधिनियम] 1956 के अन्तर्गत पंजीकृत एक सरकारी कम्पनी है। कम्पनी अधिनियम] 1956 के अन्तर्गत कम्पनी के प्रबन्धन के सभी अधिकार निदेशक मण्डल में निहित हैं। निदेशकों के अधिकारों पर नियंत्रण कम्पनी अधिनियम तथा कम्पनी के मेमोरेन्डम आॅफ आर्टिकल्स आॅफ ऐसोसिएशन के अनुसार ही है। कम्पनी एक सार्वजनिक उद्यम है अतः यह भारत सरकार तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के कार्य के लिए गठित सांवैधानिक संस्थाओं द्वारा नियत मार्गदशी सिद्धान्तों] नियम] विनियम आदि का पालन करती है। 

2.1.2 निदेशक मण्डल द्वारा कार्यपालक निदेशक] सेट को प्रत्यायोजित अधिकार

कम्पनी के आर्टिकल्स आॅफ ऐसोसिएशन के अधीन प्रदत्त अधिकारों के अनुसार निदेशक मण्डल ने कम्पनी के प्रबन्धन के लिए कम्पनी के अध्यक्ष को अधिकार प्रदान किए हैं। अध्यक्ष ने यह अधिकार कार्यों के कुशल संचालन के लिए कम्पनी के प्रबन्ध निदेशकों] कार्यवाहक निदेशकों] कार्यपालक निदेशकों तथा वरिष्ठ कार्यपालकों को प्रदान कर दिए हैं। कार्य की प्राथमिकताओं को देखते हुए इनमंे समय-समय पर संशोधन किया जाता है। गोपनीय होने के कारण अध्यक्ष] निदेशकों] कार्यपालक निदेशकों तथा कार्यपालकों के वित्तीय अधिकारों का विवरण नहीं दिया जा रहा है।

2.1.3 कार्यपालक निदेशक द्वारा सेट के कर्मचारियों को प्रत्यायोजित अधिकार

सेट के प्रभावी रूप से कार्य करते रहने के लिए कार्यपालक निदेशक ने सेट में विभिन्न स्तरों पर कर्मचारियों को अपने अधिकार प्रत्यायोजित किए हैं। इन अधिकारों में सेट के कार्यपालक निदेशक के निर्णय के अनुसार समय-समय पर परिवर्तन किए जा सकते हैं।

2.2 कर्तव्य 

2.2.1 टेक्नोलाॅजी] इंजीनियरी] परियोजना डिविजन तथा केन्द्र/यूनिट कार्यालयों के कर्मचारियों और अधिकारियों (इंजीनियरों) के कर्तव्य।

  • निगमित कार्यालय या कारखानांे द्वारा भेजी गई विभिन्न योजनाओं/परियोजनाओं का विस्तृत तकनीकी अध्ययन।
  • तकनीकी] टेक्नोलाॅजी विषयक तथा टेकनाॅ-आर्थिक पक्षों के संबंध में साध्यता तथा विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करना] जिससे कारखाने व यूनिट निवेश प्रस्ताव तैयार कर सकें।
  • स्वीकृत योजनाओं तथा प्रस्तावों को कार्यान्वित करने के लिए विस्तृत इंजीनियरी सहायता उपलब्ध कराना] तकनीकी मानक तैयार व आर्डर करना] कारखानों को निविदाओं का मूल्यांकन करने तथा उन्हें अन्तिम रूप देने में सहायता देने और डिजाइनरों के काम का सुपरविजन।
  • समीक्षा/स्वीकृति के समय प्रस्तावों के समर्थन में कारखानों व यूनिटों की सहायता।
  • स्वीकृत योजनाओं तथा प्रस्तावों को कार्यान्वित करने के लिए विस्तृत इंजीनियरी सहायता उपलब्ध कराना] तकनीकी मानक तैयार व आर्डर करना] कारखानों को निविदाओं का मूल्यांकन करने तथा उन्हें अन्तिम रूप देने में सहायता देने और डिजाइनरों के काम का सुपरविजन।
  • आरम्भिक अनुसंधान एवं विकास अध्ययन के पश्चात् सफल पाई गई सभी योजनाओं को कारखानों में लागू करने के लिए विस्तृत इंजीनियरिंग तथा निवेश प्रस्ताव तैयार करना तथा उन पर कार्य का समन्वयन।
  • बाहरी इंजीनियरी तथा तकनीकी परामर्शदाताओं के कार्य में समन्वयन।
  • विभिन्न प्रविधियों में अनुसंधान एवं विकास केन्द्र से परामर्श के बाद टेक्नोलाॅजी में सुधार उपायों की पहचान तथा विभिन्न कारखानों में उन्हें लागू करने की योजना बनाना तथा इसके लिए डिजाइन व तकनीकी ज्ञान क्षमता हासिल करना। 
  • लघुकालीन/दीर्घकालीन निगमित उत्पादन लक्ष्यों के लिए उपयुक्त निवेश की जानकारी देते हुए अनुसंधान एवं विकास केन्द्र को विभिन्न उत्पादन प्रविधि मार्ग] उत्पादन सुविधाओं की पहचान में सहायता उपलब्ध कराना।

2.2.2 आईपीएसएस सचिवालय के कर्तव्य 

• कम्पनी के मानकों का विकास और राष्ट्रीय तथा अन्तर-कारखाना मानकीकरण संगठनों से समन्वयन। 

2.2.3 वित्त अनुभाग के कर्मियों व अधिकारियों के कर्तव्य:

  • कर्मचारियों के पारिश्रमिक और अनुलाभ विवरण तैयार करना व उसकी अदायगी।
  • कर्मचारियों के पारिश्रमिक व अनुलाभों से वसूली कर खाते में जमा करना। 
  • कर्मचारियों के आय कर का निर्धारण। प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अस्थायी वसूली व अन्तिम निर्धारण।
  • ठेकेदारों/विभिन्न पक्षों के बिल पास करना और उनकी अदायगी।
  • सभी लेन-देन लेखाबद्ध करना] उसका रखरखाव व जांच। कारखाना/यूनिट के नाम कार्य पर इंजीनियरी घण्टों का हिसाब डालना। 
  • खाता बन्द करना तथा उसकी तिमाही व अन्तिम लेखा परीक्षा। 
  • सरकारी तथा आन्तरिक लेखा परीक्षकों के साथ सहयोग।
  • विभिन्न विभागों/उप केन्द्रों/यूनिट कार्यालयों की जरूरतों पर विचार कर राजस्व व पूंजीगत बजट तैयार करना। 
  • कार्मिक एवं प्रशासन विभाग से विचार-विमर्श के पश्चात् कर्मचारी भवन निर्माण अग्रिम] परिवहन अग्रिम बजट तैयार करना।
  • सभी बजटों की समय-समय पर समीक्षा व नियंत्रण।
  • रांची स्थित सेल की सभी यूनिटों के लिए एक ही नकदी अनुभाग है जो लौह तथा इस्पात के लिए अनुसंधान एवं विकास केन्द्र के अन्तर्गत रांची में कार्य करता है। 

2.2.4 कार्मिक तथा प्रशासन अनुभाग के अधिकारियों तथा कर्मचारियों के कर्तव्य

  • मानव जनशक्ति आयोजन] स्थानांतरण व नियुक्ति।
  • प्रशिक्षण।
  • कार्य निष्पादन समीक्षा तथा पदोन्नति। 
  • वेतन निर्धारण।
  • भवन निर्माण अग्रिम] परिवहन] चिकित्सा उपचार आदि के लिए अग्रिम उपलब्ध कराना।
  • कर्मचारियों के लिए विभिन्न कल्याण योजनाएं चलाना। 
  • सेल की विभिन्न कर्मचारी योजनाएं चलाना।
  • छुट्टी] एलटीसी/एलएलटीसी आदि के रिकार्ड का रखरखाव। 
  • सेल निगमित कार्यालय] नई दिल्ली द्वारा जारी कार्मिक मेनुअल में बताए गए नियमों के अनुसार कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति लाभ तथा अन्य कार्मिक सेवाएं उपलब्ध कराना। 
  • सरकार द्वारा जारी संवैधानिक नियम लागू करना।
  • सौहार्दपूर्ण औद्योगिक संबंध बनाए रखना। 
  • कर्मचारियों की समस्याओं व शिकायतों को दूर करने के लिए गठित शिकायत समिति का समन्वयन। 
  • टेलीफोन व संचार सुविधा। 
  • आतिथ्य एवं यातायात। 
  • कार्यालय उपकरणों] फर्नीचर व अन्य साज सामान की मरम्मरत एवं रखरखाव। 
  • स्टेशनरी की प्राप्ति व स्टेशनरी जारी करना।
  • जन सम्पर्क गतिविधियों में समन्वयन। 

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सुपरविजन व उत्तरदायित्व सहित निर्णय की प्रक्रिया के लिए कार्रवाई

सेट सेल की ही एक डिजाइन] इंजीनियरी व परामर्शदात्री यूनिट है। इसकी मुख्य गतिविधियों में रिपोर्ट मानक तैयार करना तथा परियोजना पर कार्य के समय डिजाइनर का सुपरविजन शामिल है। परियोजना पर कार्य के सभी चरणों में निर्णय लेने की प्रक्रिया की गति अत्यन्त महत्वपूर्ण होती है। कम्पनी में निर्णय लेने के लिए परिभाषित प्रणाली मौजूद है] परन्तु हर समय इस पर कड़ाई से अमल नहीं किया जा सकता। आमतौर पर] ऐसे प्रस्ताव जिन पर निर्णय लिया जाना है उपयुक्त स्तर पर वित्तीय पक्षों व उनके महत्व तथा समय सीमा के आधार पर कार्यपालकों द्वारा शुरू किए जाते हैं। सामान्य तौर पर प्रस्ताव सहायक प्रबन्धक/उप प्रबन्धक/प्रबन्धक के स्तर पर शुरू होते हैं। इन्हें उप संयुक्त निदेशक/अतिरिक्त निदेशक द्वारा स्वीकृति प्रदान की जाती है। स्वीकृति कौन देगा यह अधिकारियों को प्रदत्त स्वीकृति अधिकार पर निर्भर होता है। जो मामले अतिरिक्त निदेशक के अधिकार क्षेत्र से बाहर होते हैं उनकी स्वीकृति कार्यपालक निदेशक देते हैं।

प्रयास यह किया जाता है की स्वीकृति प्रदानकर्ता अधिकारी के पास पहुंचने से पूर्व प्रस्ताव कम से कम स्तरों से होकर गुजरे। प्रस्ताव पर वरिष्ठ प्रबन्धक/वरिष्ठ उप निदेशक के स्तर पर भी विचार किया जाता है। आवश्यकता होने पर यह वित्त विभाग से प्रदत्त अधिकारों के आधार पर उपयुक्त स्तर पर स्वीकृति के लिए जाता है। यदि मामले दो से अधिक विभागों में विचारार्थ होते हैं तो निर्णय तेजी से करने के लिए सम्बद्ध विभागों के उपयुक्त स्तरों के कार्यपालकों की बहु-विभागीय समिति का गठन किया जाता है। 

सेट सेल की अपनी एक यूनिट है अतः] यह सेल के कारखानों/यूनिटों से कार्य प्राप्त करता है। समान्यतः सेल के इस्पात कारखाने/यूनिट लिखित में सेट के उप केन्द्रों को कार्य सौंपते हैं। प्रार्थनाएं रांची में परियोजना अनुभाग भेजी जाती हैं। परियोजना अनुभाग सम्बद्ध अनुभाग से विचार-विमर्श करता है और कार्यपालक निदेशक की अनुमति प्राप्त करता है। इसके बाद औपचारिक पत्र के माध्यम से कार्य की स्वीकृति कारखाने को भेजी जाती है।

जिन सम्बद्ध अधिकारियों को यह कार्य सौंपा जाता है] वे तकनीकी दस्तावेज तैयार करते समय आवश्यक निर्णय करते हैं। समय-समय पर सुपरविजन तथा माॅनिटरिंग कार्य विभागाध्यक्ष करते हैं तथा कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हैं। तकनीकी दस्तावेजों जैसे रिपोर्ट/मानक वरिष्ठ अधिकारियां के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य है। इस प्रस्तुति के दौरान विभागाध्यक्ष भी उपस्थित रहते हैं। डिजाइन की समीक्षा के बाद रिपोर्ट एवं मानक उपभोक्ता को जारी किए जाते हैं। 

यदि खरीद की जानी है तो मानकों पर सम्बद्ध अधिकारी/उस क्षेत्र के कर्मी विचार करते हैं तथा सम्बद्ध अधिकारी प्रस्ताव प्रारम्भ करता है। खरीद सेल निगमित कार्यालय द्वारा जारी खरीद प्रक्रिया 2000 के अनुरूप की जाती है। वित्त व कार्मिक तथा प्रशासन गतिविधियांे के बारे में आवश्यक निर्णय सम्बद्ध अधिकारी करते हैं। सेल कार्मिक मेनुअल द्वारा जारी के अनुरूप वरिष्ठ अधिकारियों के अनुमोदन के पश्चात् कार्य किया जाता है। सेट द्वारा कार्यों के लिए कारखाने द्वारा नियत मानक 

4.1 सेट द्वारा तकनीकी दस्तावेज तैयार करने और उनकी डिलीवरी तथा उपभोक्ताओं को सेवा उपलब्ध कराने के लिए नियत मानक इस प्रकार हैं 

मद

मानक (प्राप्य मानक)

उपभोक्ता शिकायत

कुल रिपोर्टों का 5 प्रतिशत 6 माह के भीतरकरना।

उपभोक्ता संतुष्टि सूचकांक (सीएसआई)

औसत सीएसआई 5 के मापदण्ड पर 3 या अधिक होना चाहिए।

उपभोक्ता के प्रश्नों/पत्रों का अन्तरिम उत्तर

इंचार्ज, परियोजना द्वारा परियोजना अनुभाग में उपभोक्ता का सन्देश प्राप्त होने की तारीख से 6 कार्य दिवस के भीतर।

कार्य स्वीकार करने/अस्वीकार करने के संबंध में अन्तिम विवरण संबंधी सन्देश

इंचार्ज, परियोजना द्वारा परियोजना अनुभाग में उपभोक्ता का सन्देश प्राप्त होने की तारीख से 6 कार्य दिवस के भीतर।

कार्य स्वीकार करने/अस्वीकार करने के संबंध में अन्तिम विवरण संबंधी सन्देश

इंचार्ज] परियोजना द्वारा परियोजना अनुभाग में उपभोक्ता का सन्देश प्राप्त होने की तारीख से 1 माह के भीतर।

डिजाइन शीटों, सारांश शीटों, डिजाइन आक्कलन, ड्राइंग, मानक

100 प्रतिशत।

सम्पादन रिपोर्टों के डिजाइन की समीक्षा

100 प्रतिशत।

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सेट द्वारा कार्यों के लिए नियम मानक

जल्दी ही प्रस्तुत किए जाएंगे। 

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सेट द्वारा अपने नियंत्रण में तथा उसके पास रखे गए नियम] विनियम] निर्देश] मेनुअल और रिकार्ड जो कर्मचारी अपने कर्तव्य निर्वाहन में प्रयोग करते हैं

कार्मिक मेनुअल (इसमें प्रबन्ध तथा कर्मचारियों द्वारा प्रयोग के लिए नियम] विनियम] प्रक्रियाएं] अनुलाभ आदि बताए गए हैं)।

सेट गुणवत्ता मेनुअल

विवरण

अध्याय शीर्षक संख्या
विषय विवरण
प्राक्कथन
विषय सूची
संकेतात्मक अक्षरों की विवेचना
आईएसओ 9000%2000 के अनुसार महत्वपूर्ण शब्द-ज्ञान
गुणवत्ता नीति और गुणवत्ता उद्देश्य
1.0 सेट का संगठनात्मक ढांचा
2.0 गुणवत्ता प्रबन्धन योजना का संगठनात्मक ढांचा
3.0 भूमिका
4.0 गुणवत्ता प्रबन्धन प्रणाली
  श्रेणी संख्या
  4.1 सामान्य आवश्यकताएं
  4.2 दस्तावेजों की आवश्यकता
5.0 प्रबन्धन के उत्तरदायित्व
  5.1 प्रबन्धन के वायदे
  5.2 उपभोक्ता का मुख्य दृष्टिकोण
  5.3 गुणवत्ता नीति
  5.4 आयोजन
  5.5 उत्तरदायित्व] अधिकार तथा संचार
  5.6 प्रबन्धन द्वारा समीक्षा
6.0 संसाधनों का प्रबन्धन
  6.1 संसाधनों का प्रबन्धन
  6.2 मानव संसाधन
  6.3 आधारभूत सुविधाएं
  6.4 कार्य परिवेश
7.0 उत्पादों की प्राप्ति
  7.1 उत्पाद प्राप्त करने के लिए आयोजन
  7.2 उपभोक्ता सम्बद्ध प्रक्रियाएं
  7.3 डिजाइन एवं विकास
  7.4 खरीद
  7.5 उत्पादन व सेवा प्रावधान
  7.6 मापदण्डों व नियंत्रण यंत्रों पर नियंत्रण
8.0 मापना, अन्वेषण तथा सुधार
  8.1 सामान्य
  8.2 माॅनिटरिंग व मापना
  8.3 अपेक्षित स्तर से परे उत्पादों का नियंत्रण
  8.4 आंकड़ों का अन्वेषण
  8.5 सुधार

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सेल के पास या इसके नियंत्रण में दस्तावेजों की श्रेणी संबंधी वक्तव्य

1. समझौता ज्ञापन (एमओयू)

सेल और इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार के बीच 2005&06 के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें कम्पनी को विश्व श्रेणी की कम्पनी बनाने तथा भारतीय इस्पात कारोबार में गुणवत्ता लाभ तथा उपभोक्ता सन्तुष्टि की दृष्टि से सबसे आगे ले जाने की परिकल्पना की गई है। इस परिकल्पना को साकार करने के लिए कम्पनी ने 2012 निगमित योजना, जो विकास का मार्ग दर्शाती है] तैयार की है। योजना दो चरणों के लिए है। प्रथम 2006&07 और फिर 2011&12 के लिए। यह दसवीं और ग्यारहवीं योजना के अनुरूप चलाई जाएगीं।

इस दस्तावेज में योजना के प्रमुख लक्ष्य व उद्देश्य] लक्ष्यों के मूल्यांकन के लिए मानक तथा इस्पात मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले सहायता तथा वायदों का उल्लेख किया गया है। साथ ही] एमओयू पर नजर रखने और उस पर कार्रवाई के लिए भी कार्य योजना बनाई गई है।

2.मेमोरेन्डम आॅफ एसोसिएशन और आर्टिकल्स आॅफ एसोसिएशन

(24 जनवरी 1973 को कम्पनी अधिनियम, 1956 के अधीन पंजीकृत)

इस दस्तावेज में सेल द्वारा कम्पनी अधिनियम] 1956 के अनुरूप उसके ढांचे] उद्देश्य और परिचालन की व्याख्या की गई है।

3. वार्षिक प्रतिवेदन

इस प्रतिवेदन में गत वित्तीय वर्ष में कम्पनी के कुल कार्य निष्पादन पर निदेशकों का प्रतिवेदन होता है। इसमें सभी यूनिटों और सहायक कम्पनियों में उत्पादन तथा उनके वित्तीय कार्य निष्पादन का भी ब्यौरा दिया जाता है। प्रतिवेदन में कम्पनी के लेखा परीक्षित] वित्तीय लेखे] व्यय तथा लाभ/हानि वक्तव्य भी शामिल किया जाता है।

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जनता से विचार-विमर्श से नीति निर्धारण व उनके कार्यान्वयन के संबंध में व्यवस्था का विवरण

तकनीकी रिकार्ड: सेट द्वारा तैयार और उपभोक्ता के प्रस्तुत निम्नलिखित दस्तावेजों की एक प्रति भावी संदर्भ के लिए कार्यालय में सुरक्षित रखी जाती है: 

  • मास्टर प्लान (एमपी)
  • दृष्टिकोण पत्र (एएन)
  • अध्ययन रिपोर्ट (एसआर)
  • साध्यता रिपोर्ट (एफआर)
  • निवेश प्रस्ताव मसविदा (डीआईपी)
  • मूल इंजीनियरी रिपोर्ट (बीइआर)
  • विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर)
  • खनन आयोजन (एमएनपी)
  • खनन योजना (एनएनएस)
  • निविदा मानक (टीएस)
  • आर्डरिंग मानक (ओएस)
  • निविदा मूल्यांकन रिपोर्ट (टीई)
  • सामान्य तकनीकी मानक (जीटीएस)
  • ठेके का मसविदा (डीसी) 

मासिक प्रगति रिपोर्ट 

जिन विभिन्न परियोजनाओं/कार्यों को हाथ में लिया गया है उनकी स्थिति के संबंध में मासिक आधार पर तैयार की जाती है तथा सेल इस्पात कारखानों के आन्तरिक उपयोग के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जाती है। 

वार्षिक कार्य निष्पादन रिपोर्ट

निम्न प्रकार की परियोजनाओं (जहां सेट परामर्शदात्री सेवाएं दे रहा है) की एक विस्तृत रिपोर्ट वार्षिक आधार पर तैयार की जाती है:

  • गत वर्ष हाथ में ली गई परियोजनाएं
  • गत वर्ष जिन परियोजनाओं पर कार्य हो रहा था
  • गत वर्ष उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई गईं रिपोर्ट व मानक

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दो अथवा दो से अधिक व्यक्तियों की ऐसी संस्थाएं] मण्डल] परिषदें] समितियां जो इसे परामर्श देने के लिए गठित की गई हों और क्या इन मण्डलों] परिषदों] समितियों तथा अन्य संस्थाओं में जनता भाग ले सकती है या इनकी बैठकों के संक्षिप्त कार्रवाई विवरण जनता को उपलब्ध हैं

सेट का अपना कोई निदेशक मण्डल नहीं है। यह सेल की एक यूनिट है तथा सेल निदेशक मण्डल के निर्णय इस पर लागू हैं। 

सेट के आन्तरिक कार्यों के लिए निम्न समितियां कार्य कर रही हैं:-

  • सेट की गुणवत्ता प्रबन्धन प्रणाली के लिए कार्य समिति: यह कार्य समिति सेट में गुणवत्ता प्रबन्धन प्रणाली में निरन्तर सुधार व रखरखाव] प्रतिस्थापन] कार्यान्वयन के लिए शीर्ष संस्था के रूप में गठित की गई है। समिति के अध्यक्ष कार्यपालक निदेशक हैं। 
  • कार्य ठेकों के लिए जांच समिति: यह समिति वार्षिक रखरखाव/सेवा ठेकों के लिए विभिन्न पक्षों द्वारा प्रस्तुत निविदाओं की जांच के वास्ते गठित की गई है। आमतौर पर अतिरिक्त निदेशक इस समिति के अध्यक्ष होते हैं। 
  • खरीद मामलों की जांच समिति: यह समिति विभिन्न पक्षों द्वारा कार्यालय उपस्कर के लिए प्रस्तुत निविदाओं की जांच के लिए गठित की जाती है। आमतौर पर अतिरिक्त निदेशक इसके अध्यक्ष होते हैं। 
  • राजभाषा समिति: (राजभाषा कार्यान्वयन समिति) यह समिति सेट के कार्यालयों में हिन्दी का प्रचार- प्रसार बढ़ाने के लिए है। इसके अध्यक्ष कार्यकारी निदेशक हैं। 
  • प्रशिक्षण सलाहकार समिति: यह समिति प्रशिक्षण योजना को स्वीकृति प्रदान करने तथा प्रशिक्षण योजना को पूरी तरह से लागू करने के लिए गठित की गई है तथा कार्यकारी निदेशक इसके अध्यक्ष हैं। 
  • सुरक्षा व अग्नि रोकथाम के लिए स्थायी समिति: यह समिति सेट के कार्यालयों का अग्नि रोकथाम के उद्देश्य से निरीक्षण करती है तथा भूल सुधारने/रोकथाम के उपायों के बारे में सलाह देती है। 
Set Order: 
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