पृष्ठभूमि और इतिहास

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अग्रदूत

सेल का आरम्भ एक स्वाधीन राष्ट्र के उदय के साथ हुआ। स्वाधीनता मिलने के पश्चात राष्ट्र निर्माताओं ने देश के तीव्र औद्योगिकीकरण के लिए आधारभूत सुविधाएं जुटाने की परिकल्पना की। इस्पात क्षेत्र को आर्थिक विकास का साधन माना गया। 19 जनवरी, 1954 को हिन्दुस्तान स्टील प्रा.लि. की स्थापना की गई। 

नए आयाम (1959-1973)

आरम्भ में हिन्दुस्तान स्टील (एचएसएल) को राउरकेला में लगाए जा रहे एक इस्पात कारखाने का प्रबन्ध करने के लिए गठित किया गया था। भिलाई और दुर्गापुर इस्पात कारखानों के लिए प्राथमिक कार्य लोहे और इस्पात मंत्रालय ने किया था। अप्रैल 1957 में इन दो इस्पात कारखानों का नियंत्रण व कार्य की देखरेख भी हिन्दुस्तान स्टील को सौंप दिया गया। हिन्दुस्तान स्टील का पंजीकृत कार्यालय आरम्भ में नई दिल्ली में था। 1956 में इसे कलकत्ता और 1959 में रांची ले जाया गया।

भिलाई और राउरकेला इस्पात कारखानों की दस लाख टन क्षमता का चरण दिसम्बर, 1961 में पूरा किया गया। दुर्गापुर इस्पात कारखाने की दस लाख टन क्षमता का चरण व्हील एवं एक्सल संयंत्र के चालू होने के बाद जनवरी, 1962 में पूरा हुआ। इसके साथ ही हिन्दुस्तान स्टील लिमिटेड की कच्चा इस्पात उत्पादन क्षमता 1 लाख 58 हजार टन (1959-60) से बढ़कर 16 लाख टन हो गई। बोकारो इस्पात कारखाने के निर्माण और परिचालन के लिए जनवरी, 1964 में बोकारो स्टील लिमिटेड के नाम से एक नई कम्पनी का निगमन किया गया। भिलाई इस्पात कारखाने का दूसरा चरण वायर रॉड मिल चालू होने के साथ ही सितम्बर, 1967 में पूरा किया गया। राउरकेला की 18 लाख टन क्षमता की अंतिम यूनिट-टेण्डम मिल, फरवरी, 1968 में चालू हुई तथा दुर्गापुर इस्पात कारखाने का 16 लाख टन क्षमता का चरण स्टील मेल्टिंग षाप में भट्टी चालू होने के बाद अगस्त, 1969 में पूरा किया गया। भिलाई में 25 लाख टन, राउरकेला में 18 लाख टन तथा दुर्गापुर में 16 लाख टन के चरण पूरे होने के साथ ही हिन्दुस्तान स्टील लिमिटेड की कुल कच्चा इस्पात उत्पादन क्षमता 1968-69 में बढ़कर 37 लाख टन और 1972-73 में 40 लाख टन हो गई।

धारक कम्पनी 

इस्पात तथा खान मंत्रालय ने उद्योग के प्रबंधन के लिए एक नया मॉडल तैयार करने के वास्ते नीतिगत वक्तव्य तैयार किया। 2 दिसम्बर, 1972 को यह नीति वक्तव्य संसद में पेश किया गया। इसके आधार पर कच्चे माल और उत्पादन का कार्य एक ही के अधीन लाने के लिए धारक कम्पनी के सिद्धान्त को आधार बनाया गया। परिणामस्वरूप, स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इण्डिया लिमिटेड का गठन किया गया। 24 जनवरी, 1973 को निगमित इस कम्पनी की अधिकृत पूंजी 2000 करोड़ रु. थी तथा इसे भिलाई, बोकारो, दुर्गापुर, राउरकेला और बर्नपुर में पांच एकीकृत इस्पात कारखाने तथा दुर्गापुर स्थित मिश्र इस्पात कारखाना और सेलम इस्पात कारखाने के लिए उत्तरदायी बनाया गया। 1978 में सेल का पुनर्गठन किया गया और इसे एक परिचालन कम्पनी बनाया गया। 

अपने गठन के बाद से ही सेल देश में औद्योगिक विकास के लिए एक सुदृढ़ आधार तैयार करने में सहायक सिद्ध हुई है। इसके अतिरिक्त इसने तकनीकी तथा प्रबंधकीय विशेषज्ञता के विकास में भी महत्वपूर्ण योग दिया है। सेल ने उपभोग करने वाले उद्योगों को निरन्तर कच्चा माल उपलब्ध करा कर आर्थिक विकास की अनेक प्रक्रियाएं प्रारम्भ की हैं। 

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