इस्पात उद्योग आने वाले वर्षों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज करेगा

City Name: 
नई दिल्ली
Release Date: 
Thu, 09/24/2015 - 17:50

नई दिल्ली 24 सितंबर, 2015 :इस्पात सचिव एवं अध्यक्ष सेल (अतिरिक्त प्रभार) श्री राकेश सिंह ने आज यहाँ आयोजित 43वीं वार्षिक आमसभा को संबोधित करते हुए कहा, “यद्यपि कंपनी के विज़न-2025 को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है, इसकी रूपरेखा में शामिल कुछ प्रमुख परियोजनाओं पर काम शुरू कर दिया गया है। राउरकेला स्टील प्लांट में अत्याधुनिक सालाना 3 मिलियन टन के हॉट स्ट्रिप मिल की स्थापना पर काम शुरू हो गया है।”उन्होंने आगे कहा कि इस मिल से उच्चशक्ति एपीआई ग्रेड्स (API X 100 तक), वाहनों के ढांचे वाले ग्रेड्स एवं अन्य मूल्यवर्धित इस्पात सहित उच्च गुणवत्ता के एचआर कॉयल्स के उत्पादन में मदद मिलेगी। उन्होंने सेल द्वारा अपनी आधुनिकीकरण एवं विस्तारीकरण योजना में तेज़ी लाने के अथक प्रयासों को सकारात्मक बताते हुए कहा, “वर्ष 2014-15 में रुपया 10,200 करोड़ मूल्य की परियोजनाएं चालू हो गईं जो कंपनी की स्थापना से अब तक सबसे अधिक है।” आगे उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान रुपया 6,840 करोड़ का पूंजीगत खर्च किया गया है और 2015-16 के लिए रुपया 7,500 करोड़ पूंजीगत खर्च की योजना है।

इस्पात उद्योग के वैश्विक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में विश्व में तैयार इस्पात की खपत, 2013 के मुकाबले 0.6 प्रतिशत बढ़कर 1537 मिलियन टन रही। चीन में 1995 के बाद पहली बार इस्पात की मांग में कमी आई है और उसके निर्यात में 2013 के मुकाबले 51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है। इन गतिविधियों से घरेलू क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ा है।

श्री सिंह ने घरेलू इस्पात उद्योग द्वारा विभिन्न कारणों की वजह से सामना किए जा रहे दबावों को रेखांकित करते हुए कहा, “भारत में इस्पात की कीमतों को वैश्विक बाज़ारों के मुताबिक करना पड़ा, जिससे अगस्त, 2014 के बाद से मूल्य प्राप्ति में तेज़ गिरावट आई। इसका असर घरेलू इस्पात कंपनियों के प्रदर्शन पर पड़ा है।”यह स्पष्ट करते हुए कि सेल भी इसका अपवाद नहीं है उन्होंने कहा, “कंपनी का शुद्ध लाभ कम रहा, जो बीते वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में बाज़ार में मंदी के चलते बिक्री से कम शुद्ध प्राप्ति के कारण हुआ है।” हालांकि आगे उन्होंने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था सुधार की दिशा में बढ़ रही है। सरकार का बुनियादी ढांचे पर फोकस भारतीय इस्पात उद्योग के लिए शुभ संकेत है। हम विश्वास से भरे हुए हैं कि आने वाले वर्षों में घरेलू इस्पात खपत में सकारात्मक वृद्धि होगी, इसके साथ ही मांग में ठहराव की स्थिति का अंत होगा।”

कंपनी के उत्पादन के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “कंपनी ने वित्त वर्ष 2014-15 में 15.4 मिलियन टन हॉट मेटल का उत्पादन हासिल किया जो वित्त वर्ष 2013-14 के मुकाबले 7 प्रतिशत अधिक है। बिक्री योग्य इस्पात का उत्पादन 2013-14 के मुकाबले 3 प्रतिशत बढ़कर 13.5 मिलियन टन रहा। कंपनी ने वर्ष 2014-15 में 302 टन कच्चा इस्पात/प्रति व्यक्ति/प्रति वर्ष की अब तक की सबसे अधिक श्रम उत्पादकता हासिल की है। शेयरधारकों ने चालू वित्त वर्ष के लिए 2.5% के और लाभांश को मंजूरी दी है, इससे कुल चुकता शेयर पूंजी का कुल लाभांश 20% हो गया है।”

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