सेल का दूसरी तिमाही में, पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुक़ाबले 32% वृद्धि के साथ, अब तक का सर्वाधिक विक्रय

City Name: 
New Delhi
Release Date: 
Thu, 12/08/2016 - 19:00

सेल का दूसरी तिमाही में, पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुक़ाबले 32% वृद्धि के साथ,
अब तक का सर्वाधिक विक्रय

दूसरी तिमाही में पिछले वर्ष इसी अवधि के मुक़ाबले 31% वृद्धि के साथ,
अब तक का सर्वाधिक विक्रेय इस्पात उत्पादन

पहली छमाही में पिछले वर्ष इसी अवधि के मुक़ाबले 12.7% वृद्धि के साथ,
बाजार हिस्सेदारी में बढ़ोत्तरी

नई दिल्ली: स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड (सेल) ने मौजूदा वित्त वर्ष 2016-17 की दूसरी तिमाही में अब तक का सर्वाधिक 36 लाख टन का विक्रय दर्ज किया है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुक़ाबले 32% अधिक है। इसी के साथ सेल ने दूसरी तिमाही में ही पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुक़ाबले 31% वृद्धि के साथ, अब तक का सर्वाधिक 34.92 लाख टन विक्रेय इस्पात का उत्पादन किया है।
सेल ने वित्त वर्ष 2016-17 की पहली छमाही (अप्रैल-सितम्बर 2016) के दौरान विक्रय में 18% की बढ़ोत्तरी, विक्रेय इस्पात उत्पादन में 20% की वृद्धि तथा बाजार हिस्सेदारी में 12.7% सुधार दर्ज किया है।
सेल प्रबंधन द्वारा इन विपरीत बाजार परिस्थितियों में, आवश्यकतानुसार अनुकूल बाज़ार रणनीति, ग्राहक और बाज़ार केन्द्रित दृष्टिकोण तथा आधुनिकीकृत सुविधाओं से उत्पादन में तेजी लाने पर ज़ोर देने का परिणाम सभी उत्पाद श्रेणियों की विक्रय वृद्धि रूप में सामने आया है। वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लक्ष्य पर चलते हुए, सेल ने मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में दुगने से भी अधिक निर्यात किया है।
सेल का कुल कारोबार 12,431 करोड़ रुपया रहा, जो विक्रय की मात्रा में बढ़ोत्तरी के चलते पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुक़ाबले 22% अधिक है। सेल ने इस वित्त वर्ष की पिछली तिमाही की प्रवृत्ति को जारी रखते हुए दूसरी तिमाही में भी 180 करोड़ रूपये का धनात्मक EBIDTA दर्ज किया है, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में EBIDTA (-) 829 करोड़ रुपये थी। सेल का वित्त वर्ष 2016-17 की दूसरी तिमाही में कर पश्चात लाभ (-) 732 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुक़ाबले कर पश्चात लाभ (-) 1108 करोड़ रुपये था। वास्तविक निष्पादन में सुधार और सकारात्मक EBIDTA के बावजूद, वैश्विक कोयला मूल्य में बढ़ोत्तरी, उच्च ब्याज दर और नई सम्पत्तियों के कैपेटलाइजेशन पर अवमूल्यन शुल्क के चलते बॉटम लाइन प्रभावित हुई है।
तकनीकी आर्थिक मानकों में, दूसरी तिमाही में पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुक़ाबले कोक दर में 3%, सीडीआई में 15% और ब्लास्ट फर्नेस उत्पादकता में 8% का सुधार दर्ज किया गया है।
इस अवसर पर सेल अध्यक्ष श्री पी के सिंह ने कहा, “कोयला मूल्य में जारी बढ़ोत्तरी के बावजूद, हम प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए लागत को कम करने, नई सुविधाओं को तेजी से चालू करने और मार्केटिंग में अभियान स्तर पर ज़ोर देने के जरिये एक एकीकृत रणनीति पर काम कर रहे हैं। बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत की प्रभावशाली आर्थिक वृद्धि के साथ चलते हुए, घरेलू इस्पात खपत बहुत ही तेज गति से बढ़ रही है। यह वृद्धि भारत सरकार की विकास केन्द्रित नीतियों के चलते संभव हो रही है, जो आने वाले समय में इस्पात खपत में और बढ़ोत्तरी का एक संकेत है।”

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