सेल की दूसरी तिमाही घटती इस्पात कीमतों और नवीकरण के लिए भारी शटडाउन से प्रभावित

Release Date: 
Fri, 11/06/2015 - 17:58

नई दिल्ली: सेल ने वित्त वर्ष 2015-16 की पहली छमाही में, पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के मुक़ाबले तप्त धातु उत्पादन में 8% और कच्चा इस्पात उत्पादन में 5% की वृद्धि दर्ज की है। हालांकि सेल को पहली छमाही में रुपया 1378 करोड़ का शुद्ध घाटा उठाना पड़ा है, जिसमें दूसरी तिमाही के दौरान रुपया 1056 करोड़ का शुद्ध घाटा भी शामिल है।

सेल का वित्तीय निष्पादन मुख्य रूप से निम्न विक्रय प्राप्ति के कारण प्रभावित हुआ है, जो वित्त वर्ष 2015-16 की दूसरी तिमाही में, पिछले वर्ष की इसी अवधि (लगभग रुपया 7500 प्रति टन) के मुक़ाबले 24% कम है। इसी अवधि के दौरान विक्रय 6.7% घटा है। हालांकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के मुक़ाबले लांग प्रोडक्ट सेगमेंट में 20% की भारी वृद्धि दर्ज की गयी है। इसी अवधि के दौरान बोकारो में हॉट स्ट्रिप मिल के नवीकरण के लिए 75 दिन के शटडाउन की वजह से फ्लैट प्रोडक्ट के उत्पादन में लगभग 15% की गिरावट आई।

सेल ने एमएमडीआर अमेंडमेंट एक्ट-2015 के तहत जिला खनिज कोष (डीएमएफ) में योगदान करने के क्रम में रुपया 280 करोड़ की अतिरिक्त राशि खर्च की है। सेल के जारी आधुनीकीकरण और विस्तारीकरण के तहत नई सुविधाओं को चालू करने के साथ ब्याज और मूल्यह्रास में वृद्धि संबंधी शुल्क में भी बढ़ोत्तरी हुई है।

बोकारो के हॉट स्ट्रिप मिल के नवीकरण साथ, कंपनी के निष्पादन में वित्त वर्ष 2015-16 की पहली छमाही में सुधार होना तय है। इस नवीकरण में नई रिवर्सिंग रफिंग मिल की स्थापना और हीट शील्ड्स शामिल हैं। इससे हॉट स्ट्रिप मिल की क्षमता न केवल 39 लाख टन प्रति वर्ष से बढ़कर 42 लाख टन प्रति वर्ष हो जाएगी बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता में और भी सुधार होगा। इसके अलावा, इस तिमाही के दौरान एक ब्लास्ट फर्नेस की भारी मरम्मत पूरी हो जाने और नई ईकाइयों से उत्तरोत्तर उत्पादन में तेजी आने से, विक्रय इस्पात के उत्पादन में आवश्यक बढ़ोत्तरी होगी।

इस्पात की भारतीय घरेलू कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह प्रभाव विशेष रूप से चीन, जापान, कोरिया और सीआईएस देशों से कम कीमत के इस्पात के आयात की वजह से हुआ है। भारतीय इस्पात निर्माताओं के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय इस्पात बाजार लगातार चुनौती बना हुआ है। भारत सरकार द्वारा सेफगार्ड शुल्क लगाने के जरिये किए जा रहे सहयोग से आने वाले महीनों में उद्योग को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि इस्पात उद्योग को कुछ और समय तक कम लागत के आयात से जूझना होगा और सरकार से कुछ और सहयोग के लिए आशान्वित रहना होगा। इस अवसर पर सचिव, सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योग और सेल अध्यक्ष, डॉ ए. के. पुजारी ने कहा, “सेल मूल्य वर्धित इस्पात के उत्पादन पर नए सिरे से ज़ोर देने के साथ आधुनिकीकृत सुविधाओं से उत्पादन में तेजी लाने और लागत में कटौती करने पर ध्यान केन्द्रित कर रहा है, जिससे मौजूदा वित्त वर्ष की शेष अवधि में कंपनी अपने निष्पादन में वृद्धि करेगा।

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